श्मशान की मिट्टी ने आवाज़ उठाई
गाँव का नाम था कालिंजर।श्मशान घाट गाँव से दो किलोमीटर दूर था। वहाँ न दीवारें टूटी हुई थीं, काँटों के जंगल उगे थे, बारिश में कीचड़ और गर्मी में धूल। लाशें आतीं तो रिश्तेदार रोते-रोते भी नाक पर रुमाल रखते। बच्चे तो दूर से ही डर जाते। लोग कहते, “अरे, मरने के बाद कौन जाएगा … Read more