श्मशान की पुकार : एक नई सुबह की कहानी
गाँव का नाम था कालिंदीपुर। गाँव के बाहर, नदी के किनारे बसा था पुराना श्मशान घाट। बरसों से वहीं अंतिम संस्कार होते आए थे। चारों तरफ़ जंगली घास, टूटे-फूटे चबूतरे, बारिश में कीचड़ और गर्मियों में धूल। लकड़ी रखने की कोई छाँव नहीं, पानी की व्यवस्था नहीं, बैठने तक की जगह नहीं। लोग आते, रोते, … Read more