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भविष्य अनिश्चित है,
पर चेतना शाश्वत है।
जो व्यक्ति अपने अंतिम संस्कार का संकल्प
जीवन रहते स्वयं लेता है,
वह भय, आसक्ति और परनिर्भरता से मुक्त हो जाता है।
जीते-जी पिंडदान
केवल एक कर्मकांड नहीं,
यह आत्मबोध, आत्मसम्मान और पूर्णता की घोषणा है।
आज ही इस सत्य को स्वीकारें—
और जीवन को निडरता व शांति के साथ जिएँ।

जीते-जी अपना पिंडदान करवाएँ

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देह का त्याग अंत नहीं, अपितु आत्मा का परमात्मा से मिलन है।
हम आपके प्रियजन की अंतिम यात्रा को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ विशेष बनाते हैं।
अंत्येष्टि बारात के माध्यम से उनका विदाई उत्सव आयोजित करें और इस दिव्य यात्रा को यादगार बनाएं।

देह-त्याग : परमात्मा से मिलन का महोत्सव